माँ तूझे भूला ना पाया !

  माँ तूझे भूला ना पाया !   आलोक पाण्डेय  कविता माँ! एक दिवस मैं रूठा था बडा ही स्वाभिमानी बन , उऋण हो जाने को , तुमसे भी विरक्त हो जाने को, त्यागी बन...