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परिंदे उड़ गए हैं आशियाँ से

परिंदे उड़ गए हैं आशियाँ से उन्हें लौटा के अब लाएँ कहाँ से सुना है लौट कर आया नहीं वो गया है इक दफ़ा जो इस जहाँ से हमारी आँख का धोखा है वरना...