इंसानियत

इंसानियत ।।।।।।।।।।।।। न चढ़ाओ चादर मजार पर खुदा का नाम लेकर, कभी तो सोच अपनी बदलो स्वार्थ से जुदा हो कर। मजार के करीब पड़ा ठिठुर रहा था इंसान , देख न पाया तू...