दिल को छूजाने वाली प्रेम कहानी Heart Touching Hindi love story

( दिल का रिश्ता )

आरोही एक सीधी और सादगी पसंद लड़की है, दुनियां के दिखावे में वो कभी नही जीती. आरोही की ज़िन्दगी एक कोरे कागज़ के सामान है, मगर गुजरते वक्त के साथ उसकी ज़िन्दगी में कई रंग बिखरने लगे . आरोही ज़िन्दगी के उस मुकाम पर खड़ी है जहाँ उसे किसी एक रंग से अपनी सारी ज़िन्दगी को रंगना है. आरोही के माँ-बाप ने आरोही के लिए कई रिश्ते देखें पर आरोही हर रिश्ते को नापसंद कर देती, उसे कोई ऐसा रिश्ता नही मिला जिसमे कोई दिखावा न हो. जो भी रिश्ते देखे वो सब अपनी हैसियत को ऊँचा बताकर दहेज़ की माँग करते. आरोही के माँ-बाप तो इस हैसियत के थे की वो दहेज़ की मांग को पूरा कर सकते थे, आरोही उनकी इकलौती बेटी है, उनका सबकुछ आरोही के लिए ही तो है। मगर आरोही चाहती थी की उसका रिश्ता ऐसे परिवार से जुड़े जिनके लिए दौलत से बढ़कर रिश्तों की एहमियत हो और जिनका वजूद किसी दिखावे का मोहताज़ न हो, जो अपने जमीर से जुड़े रहकर ही एक अच्छी शख्शियय का मालिक हो. मगर न जाने कब आरोही की ये तलाश ख़त्म होगी, ये सोचकर धीरे-धीरे बढ़ती उम्र में माँ- पापाजी की फ़िक्र बढ़ती जाती है. एक दिन आरोही के लिए एक ऐसा रिश्ता आता है जो उसके माँ-पापाजी को बहुत पसंद आता है मगर इस बार भी आरोही को ये रिश्ता पसंद नही होता , मगर माँ- पापाजी समझाते हैं की जिस तरह का रिश्ता तुम चाहती हो वैसा मिलना आसान नही है, बेटा हर इंसान में कोई न कोई कमी होती ही है मगर हमें किसी की कमियों को नही बल्कि उसकी खूबियों को देखना चाहिए और अपनी कमी को खूबी में बदलना चाहिए. आज जो रिश्ता आया है इसे ठुकराने के बाद हो सकता है इससे भी गलत रिश्ते हमें मिलें। इसलिए तुम इसी रिश्ते को अपनाकर अपनी नयी ज़िन्दगी की शुरुआत करो। माँ-पापाजी की मर्जी के आगे झुककर आरोही न चाहते हुए भी इस रिश्ते के लिए हाँ कर देती है, और चल पड़ती है उसी राह पर जो उसके माँ-पापाजी ने उसके लिए तय की है मगर इस रिश्ते का मुकाम क्या होगा ये कोई नही जानता. जिसके साथ आरोही की शादी हो रही, उसका स्वभाव आरोही के बिलकुल विपरीत होता है, मानस जिसे आरोही का स्वाभाव और उसकी सादगी पसंद तो होती है मगर वो खुद तेज स्वाभाव और हाई लाइफ स्टाइल का होता है. शादी के बाद ससुराल में सभी उसकी कदर करते क्योकि आरोही के माँ-पापाजी ने बहुत सारा दान-दहेज़ देकर विदा किया था अपनी बेटी को. धीरे-धीरे आरोही भी अपने इस नए परिवार में एडजस्ट करने लगी, मगर कुछ ऐसी बाते थी जो आरोही को परेशान कर देती, मानस अपने दोस्तों के साथ मिलकर रुपयों की बर्बादी करता , हर दिन कोई न कोई पार्टी होती रहती, और परिवार वाले इसे एक शौक मानकर बात टालते रहते. मगर आरोही को चिंता रहती है की इस तरह से तो उसके परिवार का भविष्य बर्बाद हो जायेगा, आरोही मानस को समझाने की बहुत कोशिश करती है मगर मानस को अपनी लाइफ में किसी की दखलंदाजी बर्दाश्त नही होती और छोटी-छोटी बातो पर झगड़ा होने लगता, सभी समझते हैं की आरोही मानस को अपने कंट्रोल में करना चाहती है, इसलिए वो मानस की हर बात में दखलंदाजी करती रहती है, इस सबसे धीरे-धीरे सबकी नजरों में आरोही गलत साबित होने लगी. मानस भी आरोही से दूर रहने लगा, सारे रिश्ते आरोही के खिलाफ होते गए, बहुत कोशिश करने के बाद भी कोई आरोही को समझने वाला नही होता है वहाँ. अब आरोही समझ गयी थी की ये लोग कभी बदलने वाले नही हैं और वो ऐसे लोगोँ के साथ अपनी ज़िन्दगी नही गुजार सकती, इसलिए वो मानस से तलाक लेकर खुद अपने पापाजी की कंपनी संभालती है. ज़िन्दगी के इस मोड़ पर आरोही ने एक सबक सिख लिया था की जो रिश्ते दिल से न जुड़े हों उन्हें कभी जीवन की डोर से नही बांधना चाहिए क्योकि ये डोर कब टूट जाये ये कोई नही जानता. आरोही के लिए फिर से वही रिश्ते बना पाना अब मुश्किल है. माँ-पापाजी तो खुद को ही आरोही के इन हालातों का दोषी मानते हैं, उनकी जल्दबाजी की वजह से ही आरोही का संसार बसकर भी न बस सका. आरोही माँ-पापाजी को समझाती है की ऐसे रिश्तों के टूटने से हमे कोई गम नही करना चाहिए जिनमे हमारी कोई ख़ुशी ही नही थी, जो रिश्ते रश्मो-रिवाज से तो जुड़ गए थे मगर कभी दिल से नही जुड़ पाये. मैं ऐसे रिश्तों को ज़माने के दिखावे के लिए नही निभा सकती थी क्योकि मुझे हर रिश्ते में दिल की ख़ुशी ही मंजूर है, ज़माने का दिखावा नही. आरोही अपनी दुनियां में खुश रहने की कोशिश करने लगी, उसने अपने पापाजी की कंपनी को पूरी जिम्मेदारी से संभाला और दिन ब दिन वो इसमें तरक्की हासिल करती गयी. बहुत समय के बाद एक दिन मानस आरोही से मिलने आता है, वो आरोही से माफ़ी मांगते हुए कहता है, मैंने और परिवार वालो ने हमेशा तुम्हें गलत समझा और आज उसी का ये नतीजा है की मैं मेरे परिवार सहित सड़क पर आने की कगार पर हैं, हम सबकी शाही फिजूल खर्ची की वजह से हमारा घर गिरवी पर रखा है और कंपनी भी बहुत बड़े घाटे में है, आरोही आज के हमारे बुरे वक्त में कोई भी हमारी मदद को आगे नही आ रहा, न कोई दोस्त,न कोई रिश्तेदार.

आरोही अब तुम ही हमारी मदद कर सकती हो, किसी रिश्ते की खातिर न सही मगर इंसानियत क नाते प्लीज़ तुम हमारी मदद करो. आरोही से किसी का भी दुःख नही देखा जाता है और फिर ये तो उसका वो साथी था जिसने कभी उसको समझा ही नही, मगर फिर भी आरोही इंसानियत क नाते उनकी मदद करती है,  घाटे में जाती मानस की कंपनी को आरोही खरीदकर उसको बेघर होने से बचा लेती है, और मानस को उसी कंपनी में जॉब ऑफर करती है आरोही.  अपनी ही कंपनी में अब मानस एम्प्लॉय बन गया था. क्योकि अपने परिवार की रोजी रोटी की जिम्मेदारी अब मानस पर ही आ गयी है, अपनी गलतियों को और अपनी जिम्मेदारियो को समझते हुए मानस बहुत संवेदनशील बन गया,  वक्त ने मानस को बिल्कुल बदल दिया. मानस पूरी लगन व ईमानदारी से काम करता. आरोही मानस के इस बदलाव से बहुत आश्चर्यचकित होती है, वो मानस के हालातो को समझती है इसलिए वो जरुरत रहते मानस की मदद करने की कोशिश करती रहती , धीरे-धीरे आरोही को मानस में वही शख्श नजर आने लगा, जिसकी उसे वर्षो से तलाश थी. एक दिन मानस को आजमाने के लिए आरोही मानस से कहती है, मैं तुम्हारी कंपनी वापस तुम्हारे नाम कर देना चाहती हूँ, तुम खुद अब अपनी कंपनी को संभाल सकते हो और धीरे-धीरे इसका पैसा तुम मुझे वापस करते रहना. इस पर मानस कहता है, मैं जब इस लायक बन जाऊंगा तो खुद अपनी कमाई से ही अपनी कंपनी वापस खरीदुंगा आपसे, अब मैं अपनी सच्चाई अपने जमीर से जुड़े रहकर जीना चाहता हूँ, किसी दिखावे के लिए अब मैं कुछ भी नही करना चाहता. मानस की ये बात आरोही के मन को छू जाती है, धीरे-धीरे आरोही मानस के प्रति आकर्षित होने लगी, उसके दिल में मानस के लिए बेहद प्यार और इज्जत होने लगी. मगर मानस इस बारे में आरोही के लिए क्या सोचता है, वो ये नही समझ पा रही. आरोही इस बारे में मानस से बात करने की कोशिश करती है मगर मानस को काम के प्रति इतनी लगन देखकर चुप रह जाती है. आरोही सोचती है की जब तक मानस अपने आप में कामयाब नही हो जाता तक वो कुछ नही कहेगी. धीरे-धीरे वक्त गुजरता है और मानस कामयाब होकर अपनी कंपनी वापस खरीद लेता है. और फिर से वही रुतबा हासिल कर लेता है जो उसके परिवार का पहले था. मगर मानस की शख्शियत पहले से अब बिल्कुल बदल गयी, एक कंपनी का मालिक होने के साथ-साथ अब मानस एक अच्छी शख्शियत का भी मालिक है. इस सबकी सबसे ज्यादा ख़ुशी आरोही को होती है.

मानस आरोही से मिलने आता है और कहता है, तुम्हारी वजह से ही आज मैंने वापस अपना वही मुकाम पा लिया है, तुम हमारी ज़िन्दगी में बहुत मायने रखती हो तुम्हारे लिए हम सब तहे दिल से शुक्रगुजार हैं. आरोही कल मेरी शादी है और मैं चाहता हूँ की मेरी ख़ुशी के लिए तुम जरूर आओ मेरी शादी में। मानस की शादी की बात सुनकर आरोही स्तब्ध रह जाती है, उसने ये कभी न सोचा था की मानस किसी और से शादी कर सकता है, आरोही कुछ कहती इससे पहले मानस वहाँ से जा चूका था. आरोही पूरा दिन अपने दिल के टूटने पर आंसू बहाती रही, मानस से जब उसका तलाक हुआ था तो उसकी आँख में एक भी आंसू नही आया था मगर आज मानस को दिल में बसाकर उससे दूर होने का एहसास उसे जीने नही दे रहा. रश्मों रिवाज से जुड़े रिश्ते टूटने से उसे कोई तकलीफ नही हुयी थी मगर दिल से जुड़े रिश्ते के टूटने से उसे बहुत तकलीफ हो रही. दूसरे दिन आरोही अपने दिल को समझाकर मानस की ख़ुशी के लिए शादी में आती है. आरोही के पहुँचते ही सभी उसका एक शानदार स्वागत करते हैं, और मानस उसे अपने पास लेकर आता है, आरोही मानस से उसकी होने वाली दुल्हन के बारे में पूछती है, इस पर मानस मुस्कुराते हुए आरोही को शादी के मंडप पर ले जाता है और उसको वरमाला पहनाते हुए कहता है , तुम ही तो हो मेरी सबकुछ अब तुम्हारे सिवा और कौन दुल्हन हो सकती है मेरी. ये सब देखकर आरोही ख़ुशी से मानस से लिपटते हुए रोने लगती है, मानस आरोही के आंसू पोछते हुए कहता है, अब बस अब मैं तुम्हारी आँखों में एक भी आंसू नही देख सकता, अब से हम सिर्फ रश्मो रिवाज से ही नही बल्कि दिल से भी जुड़ चुके हैं इसलिए अब कभी हम अलग नही होंगे.

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