Deep Love Poetry for him in Hindi

बातें करना तो चाहती हूँ तुमसे
ढेर सारी बातें
लम्बी चौड़ी बातें
पर कैसे करूँ
मेरे शब्द रूठे हैं तुमसे

ज़ेहन से चलते हैं तुम्हारा नाम ले
जुबां पे आते ही पर लौट जाते हैं
कभी जिद बन यूँ ही ठहर जाते हैं
या लबों पे ख़ामोशी बन बिखर जाते हैं
मेरे शब्द रूठे हैं तुमसे

मायूस हैं यह तेरी बेरुख़ी से
सुन कर भी तेरी अनसुनी से
थक कर सुस्ता रहें हैं ये राह में
तेरे सही शब्दों के इंतजार में
मेरे शब्द रूठे हैं तुमसे

मुहब्बत जतायें तो मखौल उड़ाते हो
करें शिकायत तो इल्ज़ाम इन्हीं पे लगाते हो
गुज़ारिश करें तो अनमने से हो जाते हो
इनकी हर ख़्वाहिश को नकार जाते हो
ऐसे कईं शिकवे हैं इन्हें तुमसे
मेरे शब्द रूठे हैं तुमसे

डरते हैं ये कि ग़ुलाम बनाना चाहते हो
अपनी मर्ज़ी से इन्हें बुलवाना चाहते हो
कह दे गर ये कोई सच बेबाक़ी से
भूल जाते हो तुम अपना रिश्ता मुझसे
मेरे शब्द रूठे हैं तुमसे

सुनो ! बाग़ी हुये हैं शब्द मेरे
थोड़ी फुरसत में टटोलों इन्हें
परवाह के कानों से सुन लो इन्हें
समझ की ऐनक से पढ़ लो इन्हें
बात कर इनसे मना लो इन्हें
मेरे शब्द जो रूठे हैं तुमसे

-मेजर (डा) शालिनी सिंह

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