Category: prem kavita

रुहों का मिलन- Divine Love Hindi Poetry 0

रुहों का मिलन- Divine Love Hindi Poetry

रुहों का मिलन दो रुह यूँ घुल – मिल जाएँ ,जैसे दिन- रात मिलें ,तो साँझ बन जाए ,ख्यालों में यूँ खो जाएँ ,कि अक्स अपना देखें ,और दूजा नज़र आ जाए ,रंग -रुप...