Category: हिन्दी कविता

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नेत्र

  नेत्र ———– विस्तृत नेत्रों के तरंग, और होंठो की लाली , दाह सा भरता उमंग लहरों की शीतलता संभाली ! भोली सी सरलता रूप लिए , विविधता का प्रतिरूप लिए , हो सुरम्य...

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माँ तूझे भूला ना पाया !

  माँ तूझे भूला ना पाया !   आलोक पाण्डेय  कविता माँ! एक दिवस मैं रूठा था बडा ही स्वाभिमानी बन , उऋण हो जाने को , तुमसे भी विरक्त हो जाने को, त्यागी बन...

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संस्कृति प्रवीर संभालें

  संस्कृति प्रवीर संभालें !  आलोक पाण्डेय  घनाक्षरी समर साध रहा समय है , सुविचारों संस्कारों का , वीरों के बलिदानों पर , निंदित हर विकारों का ; अपनी छाती पर अपनी संस्कृति नहीं...

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नववर्ष मंगलमय हो

  नववर्ष मंगलमय हो ! ______________ सत्य सनातन सभ्यता के रक्षक , हे उन्नत विचारों वाले , क्रुर , दु:सह दु:ख – जड़ता का विध्वंसक , हे उन्मत्त ! सुधारों वाले ! सत्यता की...

परिंदे – हिन्दी कविता 0

परिंदे – हिन्दी कविता

परिंदे  (Parinde) कभी – कभी सोचता हूँ  क्या होता होगा उन परिंदों का , जिनके घर नहीं होते , राह तो होती है , मगर सफर नहीं होते , लगता है शाम को ही...