Category: कविताएँ

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मीरा – तुम मुझे बेहद पंसद हो Hindi Poetry

मीरा  तुम मुझे बेहद पंसद हो इसलिये नहीं कि तुम कृष्ण भक्त हो पसंद हो क्यूँकि स्त्री इतिहास में तुम एक सशक्त स्त्री हो महल बना पिंजरा सोने का सांमती युग की थी मनमानी...

चुप्पी 1

चुप्पी Hindi Poem By Radha Thakur

चुप्पी चुप्पी मान दिलाती है सम्मान दिलाती है । चुप्पी डर जैसी , खुदगर्ज होती है । चुप्पी गुस्से को पिघलाती मासुमियत-सी होती है । चुप्पी इन्साफ नहीं करती खौफनाक मंजर दिखलाती है ।...

एहसास: एक रोमांटिक कविता 0

एहसास: एक रोमांटिक कविता

( एहसास ) तू कोई हवा का झोंका है या मेरे ख्वाबो का झरोखा, बंद निगाहों में पास होता है खुली निगाहों में न जाने कहाँ होता, महसूस करके तुझको जीती हूँ हर लम्हा...

अखंड भारत की ओर Hindi Kavita 0

अखंड भारत की ओर Hindi Kavita

अखंड भारत की ओर —————————————- —————————————- आघातों की राहों में सुन्दर मुस्कान बढाता जा, राष्ट्रदूत हे वीर व्रती भारत को भव्य सजाता जा, सुस्थिरता को लाता जा । अगणित कर्तव्यों के पुण्य पथ पर...

( वह )  हिंदी काव्य  Hindi Poetry By कवि आलोक पान्डेय 0

( वह ) हिंदी काव्य Hindi Poetry By कवि आलोक पान्डेय

वह हर दिन आता सोचता बडबडाता,घबडाता कभी मस्त होकर प्रफुल्लता, कोमलता से सुमधुर गाता… न भूख से ही आकुल न ही दुःख से व्याकुल महान वैचारक धैर्य का परिचायक विकट संवेदनाएँ गंभीर विडंबनाएँ कुछ सूझते...

वजूद – Motivational Hindi Poetry By Sonam Satya 0

वजूद – Motivational Hindi Poetry By Sonam Satya

वजूद इस जहान में बसने वालेतू खुद के वजूद की ऐसी बस्ती बना,जिसमें तेरी शख्शियतजमाने का नूर बन जायेखुद की ऐसी हस्ती बना,मुश्किलों की उठती लहरों मेंजो मुकाम का साहिल दिला देहौंसलों की ऐसी...

खुदा पर कविता – Enjoy Our Famous and Latest Poem on Khuda 0

खुदा पर कविता – Enjoy Our Famous and Latest Poem on Khuda

खुदा इस दुनियां में कुछ भीखुदा से अंजान नहीं है,उसकी कोई भी फितरतइस जहान में बेईमान नहीं है,रहमतों में उसकी वो नूर हैपल में इन्साँ खुशियों के पासपल में गमों से दूर है,अंधेरों में...

जिंदगी पर कविता- Hindi Poem on Life By Sonam Satya 0

जिंदगी पर कविता- Hindi Poem on Life By Sonam Satya

 जिंदगीपल में उदास होती हैपल में खुशियां संजोती हैजिंदगी ये न जाने कैसीअजब पहेली है,कभी लगे अजनबीकभी लगे सहेली है,पल में ख्वाहिशों का मेला हैपल में हर लम्हा अकेला है,जिंदगी ये न जानेकैसे-कैसे मोड़...

कुंभकार A Poem on Kumbhkar in Hindi 0

कुंभकार A Poem on Kumbhkar in Hindi

कुंभकार       माटी से बना इंसान,       एक दिन माटी में ही है मिल जाना,       फिर भी पत्थर दिल बना जमाना,       क्यों भूला है वो खेल पुराना,       जिस माटी की सोंधी...

बचपन के दिनों पर छोटी कविता- ( बचपन की गलियां ) 0

बचपन के दिनों पर छोटी कविता- ( बचपन की गलियां )

( बचपन की गलियां)        नन्हें-नन्हें लड़खड़ाते कदमों से         गुजरते थे जहाँ,        घर-आंगन में अठखेलियां करते थे जहाँ,        माँ के आंचल में पिता के कांधे पर        शिर रखकर सुकून मिलता...