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माँ तूझे भूला ना पाया !

  माँ तूझे भूला ना पाया !   आलोक पाण्डेय  कविता माँ! एक दिवस मैं रूठा था बडा ही स्वाभिमानी बन , उऋण हो जाने को , तुमसे भी विरक्त हो जाने को, त्यागी बन...

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संस्कृति प्रवीर संभालें

  संस्कृति प्रवीर संभालें !  आलोक पाण्डेय  घनाक्षरी समर साध रहा समय है , सुविचारों संस्कारों का , वीरों के बलिदानों पर , निंदित हर विकारों का ; अपनी छाती पर अपनी संस्कृति नहीं...

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तांडव

तांडव नाचो, हे नाचो, नटवर ! चन्द्रचूड़ ! त्रिनयन ! गंगाधर ! आदि-प्रलय ! अवढर ! शंकर! नाचो, हे नाचो, नटवर ! आदि लास, अविगत, अनादि स्वन, अमर नृत्य – गति, ताल चिरन्तन, अंगभंगि, हुंकृति-झंकृति कर थिरक-थिरक हे विश्वम्भर ! नाचो, हे...

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मंगल – आह्वान

मंगल-आह्वान भावों के आवेग प्रबल मचा रहे उर में हलचल। कहते, उर के बाँध तोड़ स्वर-स्त्रोत्तों में बह-बह अनजान, तृण, तरु, लता, अनिल, जल-थल को छा लेंगे हम बनकर गान। पर, हूँ विवश, गान...

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श्रद्धेय त्रिवेणी पाण्डेय जी का श्राप

    [ एक ऐसा भयानक श्राप जिससे दयानाथ पाण्डेय और उसके परिवार एवं श्रद्धेय त्रिवेणी पाण्डेय जी के तीनों पुत्र श्रीहीन हो गए –  कुकर्मों से आहत होकर श्रद्धेय त्रिवेणी पाण्डेय जी ने...

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नववर्ष मंगलमय हो

  नववर्ष मंगलमय हो ! ______________ सत्य सनातन सभ्यता के रक्षक , हे उन्नत विचारों वाले , क्रुर , दु:सह दु:ख – जड़ता का विध्वंसक , हे उन्मत्त ! सुधारों वाले ! सत्यता की...

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दालान के वे दिन

  दालान के वे दिन ! _______________ वर्ष के सबसे काठिन्य दिनों में भी , बसंत में परिवेष्टित डूबा हुआ , न कुंठित न स्तम्भित श्वास तरंगी प्रतिक्षण शून्य में भी निरत रचने पर्वत...

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अरे धन्या भारतभूमि

  अये धन्या भारतभूमि ! तरुण- करूणा-पूर्ण-हृदया: ध्येये ध्यानं निवेश्य पुण्यसलिला अमर-तटिनी-रोधसि । भव-आभोग-उद्विग्न क्रोशन विभो  पश्यताम् प्रभूत कटुता ; कदा संपत्स्य तपोभूमि स्पृशां अखण्डम् परम् शाश्वतम्।। भावार्थ – हे धन्या भारतभूमि । कोमल...

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नमन हे आर्यभट्ट

नमन_हे_आर्यभट्ट ______________ ग्रह नक्षत्र सूत्र समेकन नदियों का कल कल निनाद , गणित सार ज्योतिष रहस्य करता सदैव हे आर्यभट्ट याद ! है सत्य धरा को तूने शुन्य परिचय ज्ञान दिया , सागर की...