सोच बदल देने वाली कहानियाँ । Motivational story in Hindi

आज मैं आपके साथ 2 ऐसी कहानियाँ ( Motivational stories in Hindi ) पेश करने जा रहा हूँ जो आपको चीजों को देखने का और उनके बारे में सोचने का एक अलग नजरिया देगी।

ये कहानियाँ बहुत मजेदार और एक अच्छी सीख देने वाली हैं और आपके सोच को एक अच्छी दिशा देंगी। तो चलिये एक-एक करके इन कहानियों को शुरू करता हूँ इस उम्मीद क़े साथ की आपको इनसे कुछ सीख मिले।

तोते की परेशानी

एक तोता था जो बहुत चहचहाता था और पूरे दिन आसमान में उड़ता रहता था । वह तोता हमेशा अपने साथ एक पोटली लेके उड़ता था । उसकी एक आदत थी कि जब भी उसके साथ कुछ अछा होता था तो उस पोटली में उतने सफ़ेद पत्थर रखता था, और जब कुछ बुरा होता तो उस पोटली में काले पत्थर रखता था ।

जब दिन ख़तम होने को आता तो वो रात को उस पोटली को खोलता और सफ़ेद पत्थरो को देखकर दिन में जो भी अच्छी बाते हुई रहती थीं उनको याद करके खुश होता और काले पत्थरो को देखकर  दिन में जो भी बुरी बाते हुई रहती थी उनको सोचकर दुखी होता रहता था और वो ऐसा रोज करता था ।

पत्थर जमा करते-करते उसकी पोटली का वजन धीरे-धीरे बहुत भारी हो गया और तोते को उड़ने मै बहुत परेशानी होने लगी।

और पूरे दिन अच्छा-बुरा सोचते-सोचते उसका दिमाग कमजोर हो गया था और उसे समज नहीं आ रहा था की वह उड़ क्यों नहीं पा रहा है।

कुछ दिन बाद पोटली का वजन हद से ज्यादा भारी हो गया और उसका जमीं पर भी चलना कठिन हो गया।

देखते ही देखते वह खाने का भी इंतजाम नहीं कर पाया और अपने पत्थरो  की वजह से मर गया ।

 

सिख:

जब हम अपनी बीती हुई अच्छी या बुरी बातो का बोझ अपने साथ लेकर चलते  रहते हैं तो हमारा भी वही हाल होता है जो इस कहानी में तोते का हुआ। तो भूत और भविष्य का चिंता छोड़ो और अपने वर्तमान का आनन्द उठाओ ये वापस नहीं आने वाला है।

एक गुस्सेल लड़के की कहानी

एक छोटे से गाँव में एक लड़का रहता जिसका स्वभाव बहुत गुस्सैल किस्म का था, जो भी उसको देखता या फिर उससे बात करने की कोशिश करता उसके ऊपर वह लड़का बहुत जल्दी क्रोधित हो जाता था । उसके ऐसे स्वभाव को देखकर उसके घरवाले बहुत परेशान थे।

और इससे परेशान होकर उसके पिताजी उसके स्वभाव को बदलने का एक हल निकाला और एक काम करने को बोला जिसमे उसको हथोडा और उसके साथ बहुत सारी कील दे दी और बेटे को बोला की जब भी तुम्हे गुस्सा आये या फिर तुम किसीसे बुरी तरह से बात करो तो एक कील दीवार पर लगा देना ।

उसके पिताजी ने बोला कि तुम्हें ये काम एक महीने तक करना है उसके बाद तुम जितना चाहे उतना गुस्सा करना।

लड़के ने पिता की बात को मान लिया और अपने के गुस्सैल स्वभाव की वजह से उसने 1 ही दिन मै ३० किल दीवार में लगा दी ।

फिर पिताजी आये और बोले की जब भी किसी से अच्छी तरह से बात करो या फिर गुस्सा न करो तो दीवार में से एक कील निकल लेना । उसके अगले २० दिन बाद लड़के ने गुस्सा करना बंद कर दिया और सबसे अच्छी तरह से बात करने लगा ।

महीने के अंत में एक-एक करके सारी कील से दीवार निकल गई और दीवार में एक भी कील नहीं बची । लड़का यह देख के बहुत खुश हुआ और अपने पिताजी से जाकर बोला की देखिये मेरे अच्छे स्वभाव के कारण दीवार में एक भी कील नहीं बची ।

पिताजी ने हस्ते हुए उत्तर दिया कि बेटा कील तो तुमने निकाल दी पर दीवार पहले जैसी सुन्दर नहीं रही । इसी तरह गुस्सा तो तुमने कम कर दिया परंतु सभी रिश्तो में तुम्हारी ख़राब निशानियाँ  छूट गई ।

पिताजी की ये बात सुनकर बेटा समझ गया और उस दिन के बाद कभी भी गुस्सा नहीं किया और सभी के साथ अच्छी तरह पेश आने लगा ।

 

सिख:

आपने ये कहावत तो सुनी ही होगी कि “कमान से निकला तीर और मुँह से निकली बात कभी वापस नहीं ली जा सकती।”

इसीलिये हमें ध्यान रखना चाहिये कि हम किसी को ऐसी बात न बोलें जो किसी को खराब लगे और गुस्सा कम करें क्योँकि गुस्से में लोगों को हम कुछ ऐसा बोल देते है जो हम नहीं बोलना चाहते और फिर बाद में पछतावा करते हैं।

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