सरबजीत सिंह: सलाखों के पीछे निर्दोष जिंदगी की हार

पाकिस्तान की कोट लखपत जेल (लाहौर) में बंद भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह का 1 मई 2013 को निधन हो गया था। सरबजीत की मौत जेल में 6 पाकिस्तानी कैदियों द्वारा हमला करने के बाद कोमा में चले जाने से हुई थी।सरबजीत सिंह ने अपनी आखिरी सांसें पाकिस्तान के जिन्ना अस्पताल में ली थी।

जेल जाने की वजह

28 अगस्त 1990 को सरबजीत सिंह बॉर्डर के पास पाकिस्तान की सीमा में गलती से चले गए थे। यहां पाकिस्तान की पुलिस ने अपनी सीमा में घुसने के आरोप में सरबजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया तथा बाद में लाहौर और फैसलाबाद में हुए चार बम धमाकों का मुख्य गुनहगार भी बना दिया था। पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में साल 2013 के जनवरी महीने में एक और भारतीय कैदी चमेल सिंह की भी मौत हो गई थी। जम्मू कश्मीर निवासी चमेल सिंह जेल में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाए गए थे।

सरबजीत एक नजर

सरबजीत का जन्म साल 1963 में भीखिविंङ, पंजाब में हुआ था। यह इलाका पाकिस्तान सीमा से सटे तरनतारन में है। इनकी पत्नी का नाम सुखप्रीत कौर है। इनकी दो बेटियां हैं जिनका नाम पूनम और स्वप्नदीप है। इनकी एक बहन भी है जिसका नाम दलबीर कौर है।

मनजीत सिंह की सजा मिली

पाकिस्तान जेल में कैद रहे सरबजीत को मनजीत सिंह मिली थी। FIR मे मनजीत सिंह का नाम था। गलत पहचान की वजह से पाकिस्तान पुलिस सरबजीत को ही मनजीत सिंह बतलाती रही। भारत में रह रहे सरबजीत सिंह के परिवार ने इस मामले में पाकिस्तान पुलिस को काफी चिठ्ठीया भी लिखी थी परंतु कोई फायदा नहीं हुआ। बताया जाता है कि मूल रूप से भारत के जालंधर में रहने वाले मनजीत सिंह के संबंध खुफिया एजेंसियों और आतंकी गुटों से थे।

पुस्तक भी लिखी गई

सरबजीत के वकील ओवैस शेख ने सरबजीत की पहचान और पाकिस्तान जेल में बिताए उसके समय का वर्णन “सरबजीत सिंह: ए केस ऑफ मिस्टेकन आइडेंटिटी नामक पुस्तक में किया है।

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