शहीदों की शहादत पर SAD Hindi Poem By Manju

कलम ने आज लिखने से इंकार कर दिया।
स्याही ने आज अपना रंग लाल कर दिया।

चीथड़ों में उड़ गए हमारे देश भक्त यहां,
उनके बलिदान ने देश को गुलाम कर दिया।

कभी न भूल पाएगी भारत माँ अपने लाल को,
जिसने उसकी कोख को निहाल कर दिया।

अलबिदा न कह पाए हमारे शेरे जिगर जाते जाते,
कायर दरिन्दों ने जो पीछे से वार कर दिया।

भूल नही पाएंगी वो मंजर दो सौ साठ करोड़ आँखे,
किस तरह लाल के खून से धरती को लाल कर दिया।

शहीदों की शहादत पर जलती रही है मोमबत्तियां यहाँ,
आज उसकी पीड़ा ने आग का सैलाब ला दिया।

आज करता है नमन तुम्हें ये धरती और आसमान,
तुम्हारी कुर्बानी ने एकता का बिगुल बजा दिया।

लौट कर आना फिर इसी माँ के आँचल तले,
जिसकी कोख ने जन्म देकर तुम्हें शेर बना दिया।

मंजू भारद्वाज

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