बदलाव आजकल


बदलाव आजकल

अरमान और अल्फाज़ बदल जाते हैं ,

कभी-कभी बेसुध भी गिरकर संभल जाते हैं ,

चमक सितारों की महफूज़ नहीं रहती ,

जब बादल अपने घर से निकल जाते हैं ।

मगरूर इस दुनिया से उम्मीद क्या करना ,

अक्सर ये ज़ख्म देकर यूँही कुचल जाते हैं ,

चमक पत्तों की ओस से ही ज़िंदा है ,

मगर धुप में वो भी पिघल जाते हैं ।

आसमान की ऊंचाई का तफ्तीश क्या करना ,

सितारे चाँद से मिलने आजकल जाते हैं ,

चाह सबको है मेरे नज़्म से रूबरू होने की ,

तभी फ़रिश्ते ज़मीन पर उतारकर पैदल जाते हैं ।

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