प्रेम तू छिपा है कहाँ – Hindi Ghazal by Manju

प्रेम तू छिपा है कहाँ

ऐ साकी कुछ दर्द पिला तभी मजा है पीने में ,
वरणा इस दुनियाँ में यारों मजा कहाँ है जीने में।

कर इनायत प्रेम की अब ये दिल बेजार हुआ ,
प्रेम के बाजार में हर आशिक शर्मशार हुआ।

नहीं है चाहत सच्चे प्रेम की आशिक को यहाँ ,
हर नुक्कड़ पर सजा है प्रेम का मजमां यहॉँ।

चिरचिर नूतन हो रही है चाहतों की महफ़िल यहाँ ,
प्रेम खुद हैरान है देख अपना बदला जहाँ।

अब प्यार प्यार नहीं है एक सौदा हो गया ,
मरते थे जो प्यार पर वो इश्क जुदा हो गया।

निगाहें ढुढतीं है तुम्हें ऐ प्रेम बता तू है कहाँ ,
न प्रेमी के दिलों में है तू न जज्बातों में है तू।

न रहमोंकरम में है तू न हालातों में है तू ,
न आसमाँ में है तू न धरती के गर्त में है तू।

तेरे बिना ये जिन्दगी मय बिना मयखाना है ,
तेरे ही पहलू मे हर आशिक बनाता आशियाना है।

सब को है तड़प तेरी मिलता नहीं ठिकाना है ,
ढूँढता तुझे ही पल पल ये मगरूर जमाना है !

मंजू भारद्वाज

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