तकनीकी उन्नति एक वरदान या समाज के लिए खतरा

( तकनीकी जीवन )


आज हम लोग तकनीक के जरिये यह समूची सभ्यता एकाएक सौकड़ों साल आगे पहुँच गए हैं. और आज पूरी दुनियां इसकी आश्रित हो गयी है, यह तकनीक ही अब हमारा आँख, कान, नाक बन गयी है, तकनीक की शक्ति से ही हम जीवन की रक्षा कर रहे हैं, उसका पोषण कर रहे हैं और यहाँ तक की सृजन भी. इस सबको देखते हुए क्या कभी किसी ने कल्पना भी की होगी की यही तकनीक अब हमारे विनाश का कारण बनती जा रही है. अगर इसे कभी नही रोका गया तो इसका परिणाम एक ही होना है- एक दोहरा व विहीन अंत. यही इस धरती की प्रकृति रही है. हजारों लाखों साल पहले भी साम्राज्य थे, पहले भी हम लोगों ने लालच, लोभ, अत्याचार किया, आपस में लड़े, प्रकृति के विरुद्ध चले और आज उनके सिर्फ अवशेष तलाशे जाते हैं. और आज भी हम सब फिर से वही सब कर रहे हैं, और अब अगर इसे वक़्त रहते नही रोका गया तो यह पृथ्वी हरी, नीली जीवन से परिपूर्ण, एक दिन ब्रह्माण्ड के उन रोष ग्रहों की बिरादरी में शामिल हो जायेगी, जहाँ सिर्फ नंगे पहाड़, सूखे गड्ढे, और पथरीली बंजर धरती है, जहाँ केवल नीरसता है, निस्तब्धता है और सब जगह छायी रहने वाली निर्जीवता की ख़ामोशी है. ये सब देखते हुए अब यह हम पर निर्भर है की हम क्या चाहते हैं. क्या हम भी डायनशोर की तरह मात्र अवशेष बन जाने के लिए अस्तित्व में आये हैं. वे प्राणी शायद मंद-बुद्धि थे, इसलिए नष्ट हो गए. और हम सब शायद इसलिए नष्ट हो जायेंगे क्योंकि हम सर्वाधिक बुद्धिमान हो गए हैं.

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1 Response

  1. NTSingh says:

    Thank you very much for this

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