क्या यही किसान कि कहानी है ?

ढह गया घर तूफान में, 
ज़मीन चली गई बाढ़ में,
न रहने का,न खाने का ठिकाना,
फिर भी कर्ज़ में बीत गई ज़िंदगी,
क्या यही किसान कि कहानी है ?

दम तोड़ रही हैं ख्वाईशें,
सपने देखने का हक,
तो उसे फिर कहाँ है, 
मजबूर बन मजदूरी,
में बीत गई ज़िंदगी, 
क्या यही किसान कि कहानी है ??
(स्वरचित – हिमानी शर्मा) 

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